आप अपने गर्भाशय की मालिश कैसे करते हैं?HealthPlanet

Posted on Fri 11th Nov 2022 : 09:30

डिलीवरी के बाद क्‍यों जरूरी होता है मालिश करवाना

मन और शरीर को आराम देने के लिए डिलीवरी के बाद मालिश की जाती है। शरीर में कोई दर्द हो तो वो भी दूर हो जाता है। अच्‍छी मालिश से शारीरिक, भावनात्‍मक और मानसिक रूप से लाभ मिलता है।


डिलीवरी के बाद क्‍यों जरूरी होता है मालिश करवाना
प्रेगनेंसी के नौ महीने महिलाओं के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से काफी थकाऊ और चुनौतीपूर्ण होते हैं। गर्भावस्‍था खत्‍म होने पर डिलीवरी के बाद भी इससे उबरने में महिलाओं को समय लगता है। डिलीवरी के बाद जल्‍दी रिकवर करने के लिए मालिश करने की सलाह दी जाती है। डिलीवरी के बाद मालिश से उन मांसपेशियों और ऊतकों को मजबूती मिलती है जो गर्भावस्‍था के दौरान कमजोर हो गई होती हैं।

तो आइए जानते हैं कि डिलीवरी के बाद मालिश करवाने के क्‍या फायदे होते हैं।

​डिलीवरी के बाद कब मालिश करवाएं

जब भी आपको ठीक लगे आप मालिश करवा सकती हैं। आपकी सिजेरियन डिलीवरी हुई हो या नॉर्मल डिलीवरी, पूरी तरह से रिकवर होने में आपको 6 से 8 हफ्ते का समय लगेगा।

डिलीवरी के पांच दिन बाद मालिश करवा सकती हैं, लेकिन अगर आपकी सिजेरियन डिलीवरी हुई है तो घाव को पूरी तरह से भरने दें।

आयुर्वेद में डिलीवरी के बाद महिलाओं को 40 दिन तक प्रसूति अवस्‍था में रहना होता है। इस दौरान मालिश करने से महिलाओं की जल्‍दी रिकवरी होती है।
​मालिश करने के फायदे

डिलीवरी के बाद मालिश करवाने से महिलाओं के शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं, जैसे कि :

पेट की मालिश करने से गर्भाशय में जमा गंदगी साफ होती है और गर्भाशय को अपने सामान्‍य आकार में आने में मदद मिलती है। नरम ऊतकों की मालिश से रक्‍त प्रवाह बेहतर होता है और शरीर से अतिरिक्‍त फ्लूइड और विषाक्‍त पदार्थ बाहर निकलते हैं।
मालिश से ब्रेस्‍ट के ऊतक उत्तेजित होते हैं जिससे आसानी से ब्रेस्‍ट मिल्‍क निकलने में मदद मिलती है। ब्रेस्‍ट में कोई गांठ हो तो वो भी ठीक होती है और ब्रेस्‍ट की रक्‍त नलिकाओं के अवरूद्ध होने की वजह से होने वाले मैसटिटाइटिस को रोकने में भी मदद मिलती है।


​कब नहीं करवानी चाहिए मालिश

एक्जिमा या रैशेज होने पर मालिश नहीं करनी चाहिए। तेल या मसाज प्रोडक्‍ट्स को निप्पल्स पर न लगाएं और पैराबीन युक्‍त उत्‍पादों का प्रयोग न करें।

हाई ब्‍लड प्रेशर और हर्निया जैसी स्‍वास्‍थ्‍य स्थितियों की मरीजों को मालिश करने वाले व्‍यक्‍ति को इसकी जानकारी दे देनी चाहिए ताकि इनसे जुड़े प्रेशर प्‍वाइंट्स को न दबाया जाए। सूजन, तेज सिरदर्द में भी मालिश नहीं करवाएं।


मालिश के लिए सही पोजीशन

मालिश के दौरान कई बार पोजीशन बदलने की जरूरत पड़ती है। आप अपनी सहजता के अनुसार भी पोजीशन चुन सकती हैं। सिजेरियन डिलीवरी में करवट लेकर या बैठकर मालिश करवाना सही रहता है। पीठ, ब्रेस्‍ट और पेट को सहारा देने के लिए आप तकिए का इस्‍तेमाल भी कर सकती हैं।


क्‍या सावधानी बरतें

अगर आप सी-सेक्‍शन डिलीवरी के बाद मालिश करवाना चाहती हैं तो एक से दो हफ्ते बाद ही करवाएं। ऑपरेशन के बाद डॉक्‍टर से पूछकर ही मालिश शुरू करवाना बेहतर रहता है। जब आपके घाव पूरी तरह से भर जाएं, तभी मालिश करवाना शुरू करना चाहिए।

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